रायपुर। छत्तीसगढ़ में निलंबित डीएसपी कल्पना वर्मा से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। शिकायतकर्ता कारोबारी दीपक टण्डन ने आरोप लगाया है कि अधिकारी के खिलाफ जांच रिपोर्ट सामने आने और निलंबन के बावजूद अब तक विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है। उनका दावा है कि न तो उन्हें जांच की प्रगति की जानकारी दी गई और न ही अब तक आरोप-पत्र दिए जाने की कार्रवाई पूरी हुई है।
टण्डन का कहना है कि मामले में प्रशासनिक स्तर पर फाइल लंबित है और जांच अधिकारी की नियुक्ति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने सूचना के अधिकार के जरिए मामले की स्थिति जानने का प्रयास किए जाने का भी दावा किया है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे प्रकरण में तय प्रक्रिया के तहत विभागीय जांच जल्द शुरू की जाए और यदि आरोप प्रमाणित पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाए।

जांच रिपोर्ट में अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश का दावा
शिकायत से जुड़े विवरण के अनुसार, पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर आईजी अमरेश मिश्रा द्वारा मामले की जांच की गई थी। टण्डन का दावा है कि जांच के बाद तैयार विस्तृत रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी गई, जिसमें उनके द्वारा लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर माना गया और अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई। इसके बाद डीएसपी कल्पना वर्मा को निलंबित किया गया।
हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि निलंबन के बाद आगे की विभागीय प्रक्रिया अपेक्षित गति से नहीं बढ़ी। उनका कहना है कि इतने समय बाद भी विभागीय जांच शुरू नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
आर्थिक लेन-देन को लेकर भी लगाए गए आरोप
दीपक टण्डन ने अपनी शिकायत में डीएसपी कल्पना वर्मा के साथ कथित व्यक्तिगत संबंधों के दौरान आर्थिक लेन-देन का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, उन्होंने अलग-अलग मौकों पर बड़ी रकम ऑनलाइन ट्रांसफर की तथा कुछ महंगी वस्तुएं भी दीं।
शिकायत में एक होटल में निवेश से संबंधित लेन-देन का भी उल्लेख किया गया है। टण्डन का दावा है कि निवेश की राशि अधिकारी के परिवार से जुड़े बैंक खाते में पहुंची थी। इन सभी आरोपों की वास्तविकता का अंतिम निर्धारण सक्षम जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया में ही हो सकता है।
संवेदनशील जानकारी साझा करने का भी आरोप
मामले में टण्डन ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि डीएसपी कल्पना वर्मा द्वारा नक्सल गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा की गई। शिकायतकर्ता ने कथित व्हाट्सऐप बातचीत को इसके समर्थन में साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत करने की बात कही है।
यदि इस तरह के आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल व्यक्तिगत या आर्थिक विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस विभाग की गोपनीयता और सुरक्षा से जुड़े गंभीर प्रश्न भी उठेंगे। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि और उसके आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आधिकारिक जांच आवश्यक है।
मध्य प्रदेश की कार्रवाई के बाद फिर उठा मुद्दा
टण्डन ने मध्य प्रदेश में महिला पुलिस अधिकारी से जुड़े हालिया मामले का हवाला देते हुए छत्तीसगढ़ में भी त्वरित कार्रवाई की मांग की है। उनका सवाल है कि जब किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ गंभीर शिकायत पर शासन स्तर से कार्रवाई संभव है, तो छत्तीसगढ़ में लंबित मामले की जांच को आगे बढ़ाने में देरी क्यों हो रही है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली प्रशासनिक अधिकारी डीएसपी को राहत दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी
मामले में लगाए गए आरोपों पर डीएसपी कल्पना वर्मा का पक्ष इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं हो सका। इसलिए आरोपों को अंतिम सत्य के रूप में नहीं माना जा सकता। विभागीय जांच और अन्य सक्षम कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविकता पर अंतिम निष्कर्ष निकलेगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि निलंबन के बाद विभागीय कार्रवाई किस चरण में है और जांच को आगे बढ़ाने में देरी की वास्तविक वजह क्या है। मामले की पारदर्शी जांच ही इन सवालों का स्पष्ट जवाब दे सकती है।

